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Vivekananda Quotes in Hindi

वह नास्तिक है, जो अपने आप में विश्वास नहीं रखता |

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हमारे व्यक्तित्व की उत्पत्ति हमारे विचारों में है| विचार मुख्य हैं, शब्द गौण हैं और विचारों का असर दूर तक होता है.

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हम भारत के लोग सभी धर्मों के प्रति न केवल सहिष्णुता में विश्वास करते है, वरन सभी धर्मों को सच्चा मानकर स्वीकार भी करते हैं |

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जितना अध्ययन करते हैं, उतना ही हमें अपने अज्ञान का आभास होता जाता है |

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किसी दिन , जब कभी आपके सामने कोई भी समस्या ना आये तो आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं |

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भय ही पतन और पाप का निश्चित कारण है |

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हिंदू संस्कृति आध्यात्मिकता की अमर आधारशिला पर आधारित है।

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मन की दुर्बलता से अधिक भयंकर और कोई पाप नहीं है।

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अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं|

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यह कभी भी मत सोचिये कि आपकी आत्मा के लिए कुछ भी असंभव है. ऐसा सोचना ही सबसे बड़ा पाप है|

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आप को अपने भीतर से ही विकास करना होता है। आपको कोई सीखा नहीं सकता, आपको कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता।

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आपको सिखाने वाला और कोई नहीं, सिर्फ आपकी आत्मा ही है।

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जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे . यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो , तुम कमजोर हो जाओगे ; अगर खुद को ताकतवर सोचते हो , तुम ताकतवर हो जाओगे .

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कुछ मत पूछो , बदले में कुछ मत मांगो . जो देना है वो दो ; वो तुम तक वापस आएगा ,
पर उसके बारे में अभी मत सोचो .

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बस वही जीते हैं ,जो दूसरों के लिए जीते हैं .

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स्वतंत्र होने का साहस करो . जहाँ तक तुम्हारे विचार जाते हैं वहां तक जाने का साहस करो , और उन्हें अपने जीवन में उतारने का साहस करो .

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किसी दिन , जब आपके सामने कोई समस्या ना आये – आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं .

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अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है.

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किसी की निंदा ना करें. अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं.अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये.

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उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो , तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो , तुम तत्व नहीं हो , ना ही शरीर हो , तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो.

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एक विचार लो . उस विचार को अपना जीवन बना लो – उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो , उस विचार को जियो . अपने मस्तिष्क , मांसपेशियों , नसों , शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो , और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो . यही सफल होने का तरीका है.

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हमारा कर्तव्य है कि हम हर किसी को उसका उच्चतम आदर्श जीवन जीने के संघर्ष में प्रोत्साहन करें ; और साथ ही साथ उस आदर्श को सत्य के जितना निकट हो सके लाने का प्रयास करें .

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विश्व एक व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं.

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जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते.

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वे अकेले ही जिंदा हैं, जो दूसरो के लिए जिंदा हैं,
बाकी सब जिंदा होते हुए भी मरे हुए के समान हैं |

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भय और अधूरी इच्छाएं ही समस्त दुःखो का मूल है।

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इस दुनिया में सभी भेद-भाव किसी स्तर के हैं, ना कि प्रकार के, क्योंकि एकता ही सभी चीजों का रहस्य है।

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हमारा कर्तव्य है कि हम हर किसी को उसका उच्चतम आदर्श जीवन जीने के संघर्ष में प्रोत्साहन करें ; और साथ ही साथ उस आदर्श को सत्य के जितना निकट हो सके लाने का प्रयास करें।

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आपको अपने अंदर से बाहर की तरफ विकसित होना पड़ेगा। कोई भी आपको यह नहीं सीखा सकता, और न ही कोई आपको आध्यात्मिक बन सकता है।

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आपकी अपनी अंतरात्मा के अलावा आपका कोई शिक्षक नही है।

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जिस शिक्षा से हम अपना जीवन निर्माण कर सके, मनुष्य बन सके, चरित्र गठन कर सके और विचारो का सामंजस्य कर सके। वही वास्तव में शिक्षा कहलाने योग्य है।

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